खेल और समाजसेवा उनके व्यक्तित्व के दो अन्य आयाम हैं। विद्यार्थी जीवन में वे मध्यप्रदेश स्कूल क्रिकेट टीम और इंजीनियरिंग कॉलेज क्रिकेट टीम के सदस्य रहे। आज वे अध्यक्ष, रायपुर हॉकी एसोसिएशन; अध्यक्ष, शेरा क्रीड़ा समिति रायपुर; और अध्यक्ष, एथलेटिक्स क्लब रायपुर के रूप में नई प्रतिभाओं को मंच दे रहे हैं। सामाजिक क्षेत्र में अध्यक्ष, श्री चित्रगुप्त जयंती आयोजन समिति (छ.ग.) और अध्यक्ष, संकल्प फाउंडेशन (छ.ग.) के रूप में वे समाज को जोड़ने और जरूरतमंदों की सेवा का कार्य कर रहे हैं।

उनका पारिवारिक जीवन सादगी और संतुलन का उदाहरण है। धर्मपत्नी श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव उनकी हर जिम्मेदारी में सहभागी हैं। पुत्री कु. मानली और पुत्र शिवांश उनकी प्रेरणा हैं। न्यू शांति नगर, शंकर नगर, रायपुर स्थित उनका निवास कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुला रहता है। उनका विधानसभा क्षेत्र रायपुर (उत्तर) और लोकसभा क्षेत्र रायपुर है, जहां वे सतत जनसंपर्क में रहते हैं।

आज अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के रूप में उनका विजन स्पष्ट है — सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी, भ्रष्टाचारमुक्त और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने वाला बनाना। वे मानते हैं कि संगठन ही शक्ति है, कार्यकर्ता ही पूंजी है, और अन्न सुरक्षा ही सच्ची राष्ट्रसेवा है। युवा नेतृत्व को अवसर और मार्गदर्शन देकर विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण — यही उनके जीवन का संकल्प है।

About

श्री संजय श्रीवास्तव का जीवन परिचय

भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता, कुशल संगठनकर्ता और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के रूप में श्री संजय श्रीवास्तव का नाम छत्तीसगढ़ की राजनीति में सम्मान के साथ लिया जाता है। वर्ष 1990 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े श्री श्रीवास्तव ने पैंतीस वर्षों के लंबे सार्वजनिक जीवन में संगठन की हर सीढ़ी को निष्ठा, अनुशासन और परिश्रम से पार किया है। भाजयुमो के जिला महामंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक, भाजपा के प्रदेश मंत्री से लेकर बारह वर्षों तक प्रदेश प्रवक्ता और प्रदेश महामंत्री तक, तथा नगर निगम में तीन बार पार्षद से लेकर स्पीकर और रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष तक — उनकी यात्रा एक कार्यकर्ता की तपस्या की कहानी है। वर्तमान में वे अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के रूप में प्रदेश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने के दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

श्री संजय श्रीवास्तव का जन्म 21 अगस्त 1967 को एक संस्कारी कायस्थ परिवार में हुआ। उनके पिता श्री बी.पी. श्रीवास्तव सेल्स टैक्स अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए — एक ऐसे अधिकारी जिनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल दी जाती थी। माता श्रीमती स्वराज श्रीवास्तव ने घर में सेवा, सहानुभूति और संस्कारों का वातावरण बनाया। दो भाई और दो बहनों के बीच पले संजय जी ने बचपन से ही अनुशासन और पढ़ाई को जीवन का आधार बनाया। पिता की स्थानांतरण वाली नौकरी और घर के अनुशासित माहौल ने उनमें समय प्रबंधन और जिम्मेदारी की भावना विकसित की।

शिक्षा के क्षेत्र में श्री श्रीवास्तव की उपलब्धि असाधारण है। उन्होंने 1989 में एम.टेक. की उपाधि प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के बाद वे रुके नहीं — 1990 में उन्होंने बिजनेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया, 1992 में पर्सनल मैनेजमेंट में डिप्लोमा हासिल किया और 1996 में पत्रकारिता में बी.जे.एम.सी. किया। इंजीनियर का तार्किक मस्तिष्क, प्रबंधक की कार्यकुशलता और पत्रकार की अभिव्यक्ति क्षमता — यह त्रिवेणी संगम उन्हें समकालीन नेताओं में विशिष्ट बनाता है। तकनीक से वे तथ्यों को समझते हैं, प्रबंधन से वे संगठन को चलाते हैं और पत्रकारिता से वे अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखते हैं।

वर्ष 1990 वह मोड़ था जब उन्होंने करियर के बजाय राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में उन्होंने अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्र प्रथम का पाठ सीखा। भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने गली-मोहल्लों में पोस्टर लगाए, दीवार लेखन किया, बूथ स्तर पर मतदाता सूची बनाई और कार्यकर्ताओं को जोड़ा। यह वह दौर था जब संसाधन कम थे, लेकिन संकल्प बड़ा था। साइकिल से बैठकों में जाना, रात-रात भर रणनीति बनाना — इसी तपस्या ने उन्हें संगठन का विश्वसनीय चेहरा बनाया।

1996 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा, रायपुर का जिला महामंत्री बनाया गया। यह उनकी संगठनात्मक प्रतिभा की पहली औपचारिक पहचान थी। 1998 से 2000 तक और फिर 2000 से 2003 तक वे जिला अध्यक्ष, भाजयुमो रायपुर रहे। इस दौरान उन्होंने युवाओं को बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क और आंदोलन की कला सिखाई। 2004 में वे प्रदेश महामंत्री, भाजयुमो छत्तीसगढ़ बने और 2007 में प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व मिला। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ का दौरा किया, कॉलेजों और कस्बों में युवा सम्मेलन किए और हजारों युवाओं को भाजपा से जोड़ा।

संगठन के साथ-साथ जनता ने भी उन पर भरोसा जताया। 1999 में वे पहली बार पार्षद चुने गए — काली माता वार्ड, नगर निगम रायपुर से। 2004 में नेताजी सुभाषचंद्र वार्ड और 2009 में शंकर नगर वार्ड से जीतकर उन्होंने हैट्रिक बनाई। पार्षद के रूप में उन्होंने नाली, सड़क, पानी, सफाई जैसे बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता दी। 2009 से 2014 तक वे स्पीकर, नगर निगम रायपुर रहे, जहां उन्होंने सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत किया। 2015 से 2018 तक अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण के रूप में उन्होंने शहर के सुनियोजित विकास, आवासीय योजनाओं और अधोसंरचना विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2011 से 2023 तक लगातार बारह वर्षों तक प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा छत्तीसगढ़ के रूप में वे पार्टी की आवाज बने। टीवी डिबेट, प्रेस वार्ता और जनसभाओं में उन्होंने तथ्यों, तर्कों और शालीन भाषा से पार्टी का पक्ष रखा। विरोधियों के तीखे सवालों का भी वे संयम से उत्तर देते थे, जिससे मीडिया में उनकी विश्वसनीयता बढ़ी। 2010 में प्रदेश मंत्री और 2024-2025 में प्रदेश महामंत्री के रूप में उन्होंने संगठनात्मक चुनाव, सदस्यता अभियान और बूथ सशक्तिकरण में केंद्रीय भूमिका निभाई।

संगठन, जनसेवा और नेतृत्व की सशक्त यात्रा

35 वर्षों का संगठनात्मक एवं राजनीतिक अनुभव

जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अनुभव

उच्च शिक्षा एवं बहुआयामी योग्यता

खेल एवं समाजसेवा में सक्रिय योगदान

वर्तमान महत्वपूर्ण
दायित्व

अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन

प्रदेश महामंत्री
भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़

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